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                                                                       सुदूर संवेदन आंकड़ा नीति
                                                                  इसरो : ईओएस : नीति-01 : 2001
                                                       भारतीय अन्तरिक्ष अनुसंधान संगठन बैंगलौर-560 094
                                                             सुदूर संवेदन आंकड़ा नीति (आरएसडीपी)


प्राकृतिक संसाधनों से संबंधित अत्यधिक आवश्यक एवं गंभीर सूचनाएं उपलब्ध कराने की सुदूर संवेदन आंकड़ों की क्षमता को पहचाना गया हैं ये आंकड़े समाज के लाभार्थ तथा विभिन्न स्तरों पर विकास संबंधी गतिविधियों के लिए एक प्रमुख सूचना निवेश के रूप में कार्य करते हैं।

विभिन्न विकास संबंधी अनुप्रयोगों के लिए स्वदेशी एवं विदेशी दोनों सुदूर संवेदन उपग्रहों से सरकारी तथा गैर सरकारी प्रयोक्ताओं की विशाल संख्या को ध्यान में रखते हुए :

विदेशी एवं व्यवसायी सुदूर संवेदन उपग्रहों से प्राप्त अति उच्च विभेदन चित्रों की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए तथा भारत में इन उपग्रहों से प्राप्त आंकड़ों के अभिग्रहण एवं वितरण संबंधी बेहतर प्रबंधन की आवश्यकताओं को देखते हुए :

राष्ट्रीय हित को सर्वोच्च तथा देश की सुरक्षा संबंधी जरूरतों के महत्व को पहचानते हुए:

भारत सरकार ने विकास संबंधी गतिविधियों के समर्थन में सुदूर संवेदन आंकड़ों के अभिग्रहण/वितरण के प्रवेश तथा /अथवा के प्रबंधन हेतु रूपात्मकता को शामिल करते हुए सुदूर संवेदन आंकड़ा नीति को अपनाया।

भारत सरकार के अन्तरिक्ष विभाग के अंतर्गत कथित तौर पर नीति के अंतर्गत सभी प्रकार के कार्यों के लिए एक प्रमुख केन्द्र है।

1- भारत से एक सुदूर संवेदन उपग्रह को प्रचालित करने के लिए भारत सरकार से प्रमुख एजेन्सी द्वारा अनुमति तथा/अथवा लाइसेंस आवश्यक होगा।

• राष्ट्रीय प्रतिबद्धता तथा एक जन हित के रूप में सरकार अपने भारतीय सुदूर संवेदन उपग्रह (आईआरएस) कार्यक्रम द्वारा बिंबन क्षमताओं के निरंतर पर्यवेक्षण सुधार को आश्वस्त किया जाता है।

• भारत सरकार प्रमुख केन्द्र द्वारा आईआरएस से एकत्र/प्राप्त सभी आंकड़ों की एकमात्र मालकिन होगी। सभी प्रयोक्ताओं को कथिक आंकड़े का प्रयोग करने के लिए केवल एक लाइसेंस उपलब्ध कराया तथा उपग्रह आंकड़े की उपयोगिता को बढ़ाया जाएगा।

• जहां भी राष्ट्रीय सुरक्षा तथा/अथवा अन्तर्राष्ट्रीय बंधन तथा/अथवा सरकार की विदेशी नीतियों की आवश्यकता हो वहां आईआरएस तथा अन्य किसी भी भारतीय सुदूर संवेदन उपग्रह से प्राप्त आंकड़ों का बिंबन कार्य तथावतरण पर नियंत्रण करने के लिए सरकार अपने अधिकार सुरक्षित रखती है।

2- भारत में सुदूर संवेदन आंकड़ों के अभिग्रहण/वितरण के लिए भारत सरकार से लाइसेंस/अनुमति प्रमुख एजेन्सी द्वारा ही लेना आवश्यक है।
• भारत में उपग्रह सुदूर संवेदन आंकड़ों के अभिग्रहण/वितरण के लिए एजेन्सियों के चयन और उन्हें अनुमति प्रदान करने के अधिकार भारत सरकार के पास सुरक्षित है। ऐसे आंकड़ों के वितरण तथा के लिए लाइसेंस/अनुमति प्रदान करने वाली प्रक्रिया का निर्णय लेने के लिए अन्तरिक्ष विभाग प्राधिकृत है।

• देश की विकास संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए अन्तरिक्ष विभाग के एनआरएससी को भारत में दोनों भारतीय तथा विदेशी उपग्रहों के सभी उपग्रह सुदूर संवेदन आंकड़ों के अभिग्रहण एवं वितरण के अधिकार दिए गए है।

(क) एनआरएससी अर्जन स्टेशनों के दृश्य वृत्त के भीतर आईआरएस से आंकड़ों के अभिग्रहण / वितरण हेतु अन्तरिक्ष विभाग के साथ उपयुक्त व्यवस्था करेगा।

(ख) एनआरएससी भारत में विदेशी उपग्रह आंकड़ों के अभिग्रहण/वितरण हेतु विदेशी उपग्रह प्रचालकों के साथ समझौता करने के लिए प्राधिकृत होगा। हालांकि जहां तक भारत में आइकोनॉस आंकड़ों के अभिग्रहण/वितरण का सवाल है, अन्तरिक्ष विभाग के ऐन्ट्रिक्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड संयुक्त राष्ट्र अमेरिका के स्पेस इमेजिंग द्वारा मान्य उचि नियमों व शर्तों के आधार पर समझौता करेगा तथा ऐन्ट्रिक्स द्वारा सहमत नियमों के अनुसार एनआरएससी आंकड़ों का वितरण करेगा।


• एनआरएसएसी द्वारा एक क्रमवार राष्ट्रीय सुदूर संवेदन आंकड़ा तथा सभी उपग्रहों के अभिग्रहण/विक्रय संबंधी अभिलेखागार संभाला जाएगा।

3- भारत के अलावा अन्य किसी देश में आईआरएस आंकड़ों के अभिग्रहण/वितरण के लिए भारत सरकार प्रमुख एजेन्सी द्वारा उन देशों के ऐसे निकायों/एजेन्सियों को लाइसेन्स प्रदान करेगी जो विशेष प्रक्रियाओं के अनुसार आईआरएस आंकड़ों के अभिग्रहण/वितरण में रूचि रखते हैं।

• भारत सरकार की नीति के विचाराधीन लाइसेन्स प्रदान करने के लिए निर्णय तथा विचार करने एवं सरकार की ओर से प्रत्याशित प्रयोक्ताओं के साथ लाइसेन्स के समझौते में प्रवेश करने के लिए ; अन्तरिक्ष विभाग के ऐन्ट्रिक्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड को भारत के बाहर आईआरएस आंकड़ों के अभिग्रहण/वितरण हेतु लाइसेन्स प्रदान करने की दिशा में आवेदन प्राप्त करने के अधिकार दिए गए हैं। लाइसेन्स प्रदान करने के लिए उचित फीस उगाहने का अधिकार दिया जाए। लाइसेन्स प्राप्त करने वाले के द्वारा किसी भी प्रकार की आवश्यक भावी सहायता/मार्गदर्शन के लिए भी जिम्मेदार होगी।

• जब भी राष्ट्रीय सुरक्षा तथा /अथवा अंतर्राष्ट्रीय बाध्यता तथा /अथवा सरकार की विदेश नीतियों की बात सामने आती है, आवाश्यकता पड़ने पर सरकार किसी भी देश में आईआरएस आंकड़ों के बिंबन तथा वितरण पर प्रतिबंध लगाने का अधिकार रखती है।


4- भारत में उपग्रह सुदूर संवेदन आंकड़ों के वितरण हेतु सरकार ने निम्न निर्देशों के अनुपालन निर्धारित किया है।

• 5-8 मी- विभेदन के सभी आंकड़ों को बिना भेदभाव के तथा अनुरोध के आधार पर वितरित किया जाए।
• राष्ट्रीय सुरक्षा हित में 5-8 मी- तथा उससे बेहतर विभेदन वाले चित्रों के आंकड़े वितरण के पहले उचित एजेन्सी द्वारा जांचे जाए ताकि उनमें निहित संवेदनशील क्षेत्रों को निकाला जा सके।

(क) 5-8 मी- तथा 1 मी- विभेदन तक के आंकड़ों की जांच के बाद उनमें से संवेदनशील क्षेत्रों को निकाले जाने की पुष्टि के बाद ही उन्हें प्रयोक्ताओं तक भेजा जा सकता है।

(ख) उपरोक्त के अनुसार 1 मी- तथा उससे बेहतर विभेदन के आंकड़ों की जांच की जाएगी तथा उसके वितरण के लिए निम्न प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

प्ण् सरकारी प्रयोक्ता किसी भी प्रकार की जांच प्रक्रिया से गुजरे बिना आंकड़े प्राप्त कर सकते हैं।

प्प्ण् निजी सेक्टर की एजेन्सियां कम से कम एक सरकारी एजेन्सी द्वारा सिफारिश करने पर 1 मी- या उससे बेहतर विभेदन के आंकड़े बिना किसी जांच प्रक्रिया से गुजरे प्राप्त कर सकती है। बशर्ते उनका प्रयोजन विकास संबंधी गतिविधियों के समर्थन में हो।

प्प्प्ण् अन्य निजी, विदेशी तथा अन्य प्रयोक्ता अंतर-एजेन्सी उच्च विभेदन बिंब पुष्टि समिति अर्थात इन्टर-एजेन्सी हाई रेजोल्यूशन इमेज क्लियरेन्स समिति (एचआरसी) द्वारा पुष्टि किए जाने पर प्राप्त कर सकते हैं।

प्टण् किसी भी प्रयोक्ता द्वारा किसी संवेदनशील क्षेत्र के आंकड़े एचआरसी द्वारा पुष्टि किए जाने के बाद ही वितरित किए जा सकते हैं।

टण् 1 मी- तथा उससे बेहतर विभेदन के आंकड़ों के लिए एनआरएससी तथा प्रयोक्ता के बीच विशिष्ट विक्रय/अप्रकटीकरण अनुबंध किया जाना चाहिए।


5- यह नीति तत्काल प्रभाव से लागू होगी तथा समयानुसार सरकार द्वारा इसकी समीक्षा की जाएगी।







 
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